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उर्दू के बग़ैर पुरानी फ़िल्मों की कल्पना नहीं की जा सकती

जिन्हें भी उर्दू शायरी और सिनेमा से दिलचस्पी है वो आप को कई सारी ऐसी मिसालें दे कर बता सकते हैं कि उर्दू कितनी शीरीं ज़बान है। इस ज़बान में कि...

देवेन्द्र सत्यार्थी: वो आदमी जिसने हिन्दोस्तान के गाँव-गाँव जा कर लोकगीत जमा किए

एक बार साहिर लुधियानवी और देवेन्द्र सत्यार्थी लाहौर से लायलपुर जा रहे थे, लेकिन जब वो स्टेशन में दाख़िल हुए तो उन्हें मालूम हुआ कि गाड़ी पूर...

दिन में ग़ज़ल कहते और रात तक तवायफ़ों / क़व्वालों के ज़रिये मशहूर हो जाती

रुख़-ए-रोशन के आगे शम्अ’ रख कर वो ये कहते हैं उधर जाता है देखें या इधर परवाना आता है दाग़ देहलवी ने जब ये शे’र कहा, उस वक़्त उनकी उम्र कुछ...